Tuesday, December 29, 2020

2020- Year of The Fear, 2021- Take Care Dear

सालो की गिनती में मनमानी हुई,
एक साल की थोड़ी बेईमानी हुई,

देख अपने भी गले लग ना पाए,
सांसो को सांसो से भी परेशानी हुई,

तू तो मेरे घर की थी चादर.. क्यों
अस्पताल में जाकर आसमानी हुई,

कश्ती किनारे पे थी, पानी शांत था,
बस एक ये सिर्फ जिंदगी तूफानी हुई,

खर्चा तो कम हुआ है इस साल,
फिर भी इस बार ज्यादा हानि हुई,

सालो की गिनती में मनमानी हुई,
एक साल की थोड़ी बेईमानी हुई।

✍️निशांक मोदी

Friday, September 11, 2020

आज मेरा घर टूटा है, कल तेरा घमंड टूटेगा

आज मेरा घर टूटा है, कल तेरा घमंड टूटेगा,
आज संग समय का पहिया नजाने कब रूठेगा,

दोपहरी तपती धूप में जलना तेरा वाजिब लेकिन,
कभी तो शाम होगी यहां, कभी तो सूरज डूबेगा,

गलतफहमी की आखिर तक पास होंगे लोग मेरे,
आज जो हाथो मे हाथ है ये साथ भी कभी छूटेगा,

मदहोशी में जी रहा इंसान खुद को खुदा मानके,
लूटकर जो खड़ा किया कारवां वो भी कोई लूटेगा,

फर्क होता है आसमान के सितारे और गुब्बारे में,
जो हवा के बहकाने से उड़ा किसी धार से फूटेगा।

- निशांक मोदी (पहेली पंक्ति मेरी नही है)

Saturday, September 5, 2020

શિક્ષકદિન 2020

વાંચી શિક્ષકદિનનો તહેવાર, આવ્યો મનમાં વિચાર,
બદલાઈ શિક્ષકની રીત કે બદલાઈ શિક્ષણની ધાર?

જોને આજકાલ ધ્રૂજતા નથી હાથ કઈ ખોટું કરતા,
ખોવાયા જ્યારથી સોટીના નિશાનને ફૂટપટ્ટીનો માર,

નિશાળમાં જ ગોઠવાઈ જાય પુસ્તકો ને નોટબુકો,
હલકું થઈ ગયું દફતરને વધ્યો ત્યાં જીવનનો ભાર,

ડરથી ઝૂકે બાળકો, નથી આપતા મનથી સન્માન,
હૃદય સુધી પહોંચે એવા, નથી બન્યા ઈન્ટરનેટના તાર,

શિક્ષણ ઉપરાંત શીખવે જ્ઞાન વહેંચવાની કળા,
વિદ્વાન મળતા નથી બસ મળે હવે તો ગુરુના પ્રકાર,

ગૃહકાર્ય કરતાં થઈ ગયા વાલીઓ કોને કહીએ!
કૃષ્ણ તારે જન્મવું પડશે કરવા અર્જુનની જેમ બેડો પાર.

- નિશાંક મોદી

Saturday, August 1, 2020

अभी तो सोया था में और अभी सुबह हो गई

अभी तो सोया था में और अभी सुबह हो गई
कहा खो गई मेरी परछाई,
सामने लौट फिर आई तन्हाई,
एक तरफ चुभे चादर की सिलवटे,
दूसरी ओर दर्द बाँटे मखमली रजाई,

दिन के उजाले में साथ देती जो हिम्मत,
खिलाफ जाकर रात में नजाने क्यू गवाह हो गई,
अभी तो सोया था में और अभी सुबह हो गई,

वक़्त इतना कम की सपने नही आते,
कभी आ भी जाए तो अपने नही आते,
नींद मिले तो कहना फुरसत लेकर जाना,
कुछ लोग है जिन्हें घड़ी के कांटे मापने नही आते

एक साथ, एक हमसफ़र, कुछ पल ही तो मांगे थे,
छाया अंधेरा ऐसा की ख्वाहिशे सारी गुनाह हो गई,
अभी तो सोया था में और अभी सुबह हो गई,

सोचा मांग लू कुछ, पर अब सितारे कहा टूटते है,
सामने मिल जाये तो ठीक वरना लोग कौन पूछते है,
सिर्फ सुबह, दोपहर, शाम, रात कटती नही यहाँ,
मिनिटे, घण्टे, दिन, महीने, साल किस्तो में गुजरते है,

घर के हालात तो ठीक है, जिंदगी के हालात भी पूछो,
सुबह होकर दोहराते, कल फिर एक रात तबाह हो गई,
अभी तो सोया था में और अभी सुबह हो गई।
- निशांक मोदी

Saturday, July 18, 2020

ખાબોચિયું કહી શકો

ખાબોચિયું કહી શકો, બાકી બચ્યું એ સમંદર નથી,
વહેતુ જે લાગણીનું વાદળ, લગભગ હવે અંદર નથી,

સંબંધોનું બંધન તૂટ્યું, ધ્રાસકાથી રોકાઈ જવું જોઈએ,
ધબકે છે હજી, ચોક્કસ હૃદયને ઘટનાની ખબર નથી,

મોગરો,હજારી,ગુલાબે આપ્યું વળતર માળીને ઉછેરનું,
નમ્યા વગર ઉભું સૂરજમુખી, જાણે કહે મને કદર નથી,

રકાબીમાંથી ચા ઢળે એમ ઉભરવા દેતી તી આંસુઓને,
પાંપણો દર્દમાં હોઠ જેમ દબાઈ આંખોને એની અસર નથી,

મંદિરને તાળું મારવાનો વખત આવ્યો હવે તો તું સ્વીકાર,
કાં તો અંદર કોઈ પથ્થર નથી, કાં તો અંદર કોઈ ઈશ્વર નથી,

ગણતરી કરવા માટે શ્વાસની હાજરી જરૂરી છે કે શું?,
કહો કેમ સ્મશાન, માણસ નથી તો શું મહોલ્લો કે નગર નથી,

કમાયો દુઆ સાથ મેળવીને કે સાથ ગુમાવીને 'સ્પર્શ:' બાકી,
પ્રેમ, મિલાપ, વિરહમાં કોઈ અહીં એકલે હાથે તવંગર નથી.

- નિશાંક મોદી

Sunday, May 24, 2020

न तुम शहर बदल पाए

ना तुम शहर बदल पाए, ना तुम घर बदल पाए,
ना तुम समय की मार, ना तुम क़हर बदल पाए,

कभी बेख़ौफ़ जीने की लत जो लग गई थी तुम्हे,
देखो आज ना तुम भय, ना तुम डर बदल पाए,

ऐसा होता तो ये कर देता वैसा होता तो ये कर देता,
धरी की धरी रह गई बातें, 
ना तुम अगर बदल पाए, ना तुम मगर बदल पाए,

सुना है, अब अखबार पढ़ना छोड़ दिया तुमने,
सही किया, ना तुम हालात, ना तुम खबर बदल पाए,

मिलो तक का सफर चंद घंटो मे तय किया करते थे,
वो दिनों में तब्दील हुआ, बस ना तुम डगर बदल पाए,

सबको सहलाकर संभाल लेने की जो आदत थी ना,
ना आज छू सकते हो, ना तुम मिला वो ज़हर बदल पाए,

ना तुम शहर बदल पाए, ना तुम घर बदल पाए,
ना तुम समय की मार, ना तुम क़हर बदल पाए।
- निशांक मोदी

Friday, May 22, 2020

में दूसरों की कहानी लिखूं

Thank you divine energy for protecting us🙏

में दूसरों की कहानी लिखूं, वो मेरी कहानी लिखता है,
में औरों का खयाल रखता हूं, वो मेरा खयाल रखता है,

कई बार दुआ के बदले देता है, वो परेशानियां मुझे,
शायद इसी तरह तो, वो मेरी शख्शियत परखता है,

चाहे पांव टूटे, चाहे दिल टूटे, चाहे आँखे नम हो,
मुजे फ्रिक नही, मेरी हर दर्द की दवा वो देखता है,

में गया था उसके दर पर, पथ्थर मार के चला आया,
देख उसकी खुदाई, मेरे राहों पर वो फिर फूल फेंकता है,

में दूसरों की कहानी लिखूं, वो मेरी कहानी लिखता है,
में औरों का खयाल रखता हूं, वो मेरा खयाल रखता है।

- निशांक मोदी